भीषण गर्मी के बीच जब मौसम सुकून की चादर ओढ़ लेता है...

गर्मी अपने चरम पर हो, सूरज आग बरसा रहा हो, हवाएं थम चुकी हों और हर जीव-जंतु जैसे थक सा गया हो — ऐसे में यदि अचानक एक-दो दिन के लिए ही सही, मौसम करवट ले ले तो वह अनुभव किसी वरदान से कम नहीं लगता।जब आसमान में घने बादल उमड़ने लगें, सूरज छिप जाए और ठंडी हवाएं बहने लगें — तो प्रकृति में जैसे एक नई जान सी आ जाती है। धूप से झुलसे पत्ते फड़फड़ाने लगते हैं, पशु-पक्षी जो थम से गए थे, फिर से चहचहाने और मचलने लगते हैं। चिड़ियों की वो हल्की-फुल्की किलकारियाँ, जो गर्मी में कहीं खो सी गई थीं, फिर से आसमान में गूंजने लगती हैं।ऐसे पल केवल मौसम में नहीं, मन में भी एक ताजगी घोल जाते हैं। भीषण तपिश से त्रस्त मन अचानक हल्का महसूस करने लगता है। खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हर कोना जैसे मुस्कुराने लगता है।यह बदलाव क्षणिक होता है, पर इसकी अनुभूति लंबे समय तक मन में बनी रहती है। जैसे जीवन की दौड़ में थमे हुए पल, जो बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह जाते हैं।कभी-कभी बादलों से ढका आसमान ही सबसे सुंदर दृश्य होता है — क्योंकि उसमें सुकून छिपा होता है।
✍️ बुद्धि प्रकाश तिवारी #मौसम #प्रकृति #ब्लॉग