सई नदी का उफान बरगुदर पुल का इतिहास और सिकरारा बाजार का मंजर

प्रयागराज-जौनपुर हाईवे पर स्थित सिकरारा बाज़ार का जीवंत दृश्य और उफनती सई नदी का तटीय क्षेत्र

               सिकरारा बाजार 

प्रयागराज - जौनपुर हाईवे पर सफर करते हुए एक सोचने वाला अद्भुत एवं विचारणीय दृश्य देखने को मिला । मानसूनी बारिश के कारण सई नदी और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं। नदी के दोनों किनारों पर फैली हरी-भरी वनस्पतियों के बीच मटमैले पानी का तेज बहाव आंखों को सुकून देने के साथ-साथ कुदरत की ताकत का अहसास भी करा रहा था।

उफनती सई नदी के किनारे फैली हरियाली और प्रयागराज-जौनपुर मार्ग पर स्थित नया समानांतर बरगुदर पुल

      सई नदी

1980 की बाढ़ और दो पुलों की कहानी

नदी पर बना पुराना बरगुदर पुल (Bargudar Bridge) केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि 1980 की उस भयंकर जल-त्रासदी का मूक गवाह है, जब सई नदी का पानी इस पुल के ऊपर से बहने लगा था। उस ऐतिहासिक बाढ़ ने प्रयागराज और जौनपुर का संपर्क कई दिनों के लिए काट दिया था।

उफनती सई नदी, तटवर्ती हरियाली और 1980 की बाढ़ का मूक गवाह पुराना ऐतिहासिक बरगुदर पुल

       पुराना बरगुदर पुल

उसी आपदा से सबक लेते हुए बाद में इसके समानांतर एक नया, ऊंचा और चौड़ा पुल बनाया गया। आज जहां नया पुल भारी वाहनों की तेज रफ्तार और फर्राटेदार सफर का जरिया है, वहीं पुराना बरगुदर पुल आवाजाही से दूर शांत खड़ा होकर अतीत की याद दिलाता है।

उफनती सई नदी के ऊपर बने नए बरगुदर पुल पर फर्राटा भरते वाहन और सुगम यातायात का दृश्य

पुल पार करते ही सिकरारा बाज़ार का जीवंत दृश्य

बरगुदर पुल को डांकते ही कुछ ही दूरी पर स्थित सिकरारा बाज़ार का नज़ारा सामने आता है। उफनती नदी की खामोश गूंज के ठीक बाद, सिकरारा बाज़ार की अपनी अलग ही रौनक और हलचल नज़र आती है। एक तरफ उफनती नदी का खौफ और दूसरी तरफ बाज़ार में सामान्य ढर्रे पर दौड़ती जिंदगी—यह विरोधाभास इस सफर को और भी खास बना देता है।
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