ईद-ए-मिलादुन्नबी स्पेशल: चहारसू से अटाला मस्जिद तक जौनपुर की रूहानी रौनक

रबी-उल-अव्वल की 12 तारीख यानी ईद-ए-मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर शिराज़-ए-हिंद जौनपुर की गलियाँ अकीदत, रोशनी और भाईचारे के रंग में डूबी नज़र आ रही हैं। पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश के इस मुकद्दस जश्न को कवर करने के लिए आज हम निकले हैं जौनपुर के सबसे ऐतिहासिक रास्ते पर।

 

 आइए चलते हैं चहारसू चौराहे से लेकर ऐतिहासिक अटाला मस्जिद तक के इस रूहानी सफर पर:

1. चहारसू चौराहा: रोशनी का समंदर

जौनपुर का दिल कहे जाने वाले चहारसू चौराहे पर कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो पूरा शहर रोशनी से नहा उठा हो। चारों तरफ लगा बेहतरीन चिरागां, लहराती हरी पताकाएं और अकीदतमंदों की चहल-पहल इस बात की गवाही दे रही है कि आज की रात जौनपुर के लिए बेहद खास है।

2. हरलालका रोड: बाज़ार, जायका और साझी तहज़ीब

चहारसू से आगे हरलालका रोड की तरफ बढ़ते ही रौनक दोगुनी हो जाती है। सड़क के दोनों तरफ सजी दुकानें, इत्र और टोपियों की खरीदारी करते लोग, और जगह-जगह आम जनता के लिए लगाया गया तबर्रुक व लंगर। यहाँ बहती मोहब्बत और खिदमत-ए-खल्क की बयार जौनपुर की गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत मिसाल पेश करती है।

3. कोतवाली चौराहा: अकीदत का सैलाब

कोतवाली चौराहे पर पहुँचते ही अकीदतमंदों का एक बड़ा हुजूम नज़र आता है। 'मिलादुन्नबी मुबारक' की सदाओं से गूंजता यह चौराहा जुलूस-ए-मोहम्मदी का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सुरक्षा और अनुशासन के बीच गुज़रते जुलूस में हर उम्र के लोगों का उत्साह देखते ही बनता है।

4. मजलिस व मेला: तालीमात, नात और खुशियाँ

रास्ते में जगह-जगह सजे मंचों पर महफ़िल-ए-मिलाद का दौर जारी है। एक तरफ जहाँ नात-ख्वानी की रूहानी आवाज़ें फिज़ा में शहद घोल रही हैं और उलेमा पैगंबर साहब की तालीमात (अमन, इंसानियत और भाईचारे) पर रोशनी डाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लगे छोटे-छोटे मेलों में बच्चों और परिवारों के चेहरों पर जश्न की खुशी साफ झलक रही है।

5.अटाला मस्जिद: इतिहास और इबादत का संगम

सफर का सबसे मुकद्दस पड़ाव है जौनपुर की ऐतिहासिक अटाला मस्जिद। अटाला मस्जिद की सदियों पुरानी नक्काशीदार दीवारें और मीनारे जब चिरागां की रोशनी से जगमगाती हैं, तो मंज़र देखने लायक होता है। मस्जिद की इन ऐतिहासिक दीवारों के साए में इबादत में उठे हज़ारों हाथ पूरे मुल्क और शहर में अमन, चैन व सलामती की दुआ मांग रहे हैं।

निष्कर्ष:

चहारसू से अटाला मस्जिद तक का यह पूरा रास्ता आज सिर्फ चिरागां से नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बसी अकीदत और मोहब्बत से जगमगा रहा है। ईद-ए-मिलादुन्नबी का यह पर्व हमें यही सिखाता है कि इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है।

आप सभी को बीपी लाइव 24x7 की तरफ से ईद-ए-मिलादुन्नबी की दिली मुबारकबाद!