मोहिनी देवी के सम्मान में एक आत्मीय मुलाकात, आध्यात्मिक आयोजन और 103 वर्ष के जीवन की झलक
कुछ जीवन केवल अपनी लंबाई के कारण महत्वपूर्ण नहीं होते।
वे इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि उनके भीतर एक पूरा युग सांस लेता है।
ढेरापुर अलीगंज, जौनपुर की मोहिनी देवी, जिनकी उम्र लगभग 103 वर्ष है, ऐसा ही एक जीवन हैं—एक ऐसी जीवन-यात्रा, जिसने एक सदी से अधिक समय को अपनी आँखों के सामने बदलते देखा है और आज भी जीवन-दर्शन पर अपनी अनुभूति से संवाद करती हैं।
हमारे लिए उनका परिचय केवल उनकी उम्र तक सीमित नहीं है। वे हमारे करीबी परिवार से जुड़ी हैं। इसलिए उनसे हुई हमारी यह मुलाकात किसी औपचारिक साक्षात्कार से अधिक आत्मीयता, सम्मान और अनुभव के सामने बैठने का एक अवसर है
शतायु होने का सम्मान
मोहिनी देवी के 100 वर्ष से अधिक की जीवन-यात्रा के सम्मान में शतकवीर सम्मान समारोह का आयोजन भी हो चुका है, जिसमें अनेक प्रतिष्ठित और विशिष्ट हस्तियों ने उपस्थित होकर उन्हें सम्मान और शुभकामनाएँ दीं।
यह सम्मान केवल एक उम्र का सम्मान नहीं था।
यह उस जीवन-यात्रा और उस पीढ़ी के प्रति सम्मान था, जिसने अपने समय को जिया, समाज को बदलते देखा और अब अपने अनुभवों की विरासत अगली पीढ़ी के सामने रख रही है।
आस्था के बीच एक विशेष आयोजन
इसी अवसर से जुड़े धार्मिक आयोजन की झलक भी हमारे पास मौजूद है।
सुंदरकाण्ड का पाठ, श्रद्धा से भरा वातावरण और इस अवसर पर टीना माँ, महामण्डलेश्वर, किन्नर अखाड़ा, का सीधे प्रयागराज से पधारना—पूरे आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान करता है।
टीना माँ के उद्गार और आशीर्वाद भी इस वीडियो में संजोए गए हैं।
और इसी पूरे वातावरण के बीच हमें मोहिनी देवी से कुछ क्षण बातचीत करने का अवसर मिला।
1 मिनट 58 सेकंड में पूरा प्रसंग
हमारे पास उपलब्ध यह वीडियो लगभग 1 मिनट 58 सेकंड का है।
इसमें धार्मिक आयोजन, सुंदरकाण्ड पाठ, टीना माँ के उद्गार एवं आशीर्वाद और अंत में मोहिनी देवी से हमारी वह संक्षिप्त, आत्मीय मुलाकात—सब एक साथ दिखाई देता है।
देखिए—एक शतायु जीवन के सम्मान और उस अवसर के आध्यात्मिक वातावरण की यह जीवंत झलक।
संजय मिश्र के साथ वह संक्षिप्त मुलाकात
इस मुलाकात के समय मोहिनी देवी के पुत्र संजय मिश्र भी उनके साथ उपस्थित थे।
बातचीत बहुत लंबी नहीं थी। लेकिन सामने बैठा हुआ एक ऐसा जीवन था, जिसने एक सदी से अधिक समय को बदलते हुए देखा है।
ऐसे जीवन के सामने शब्द अपने आप थोड़े छोटे लगने लगते हैं।
क्योंकि 103 वर्ष के आसपास की जीवन-यात्रा केवल वर्षों की संख्या नहीं है—यह अनगिनत अनुभवों, रिश्तों, परिवर्तनों, संघर्षों और स्मृतियों का संचय है।
एक छोटी मुलाकात, एक बड़ी विरासत
हम इस मुलाकात को किसी अंतिम निष्कर्ष के साथ समाप्त नहीं करना चाहते।
बल्कि इसे एक शुरुआत की तरह देखना चाहते हैं।
यदि आगे अवसर मिला तो मोहिनी देवी से उनके जीवन के अनुभवों, बदलते समाज पर उनकी दृष्टि और आज की पीढ़ी के लिए उनके संदेश को विस्तार से सुनने का प्रयास किया जाएगा।
क्योंकि कभी-कभी जीवन-दर्शन किसी पुस्तक के पन्नों में नहीं मिलता।
वह हमारे सामने बैठा होता है—
एक मुस्कान में, कुछ शब्दों में और एक ऐसे चेहरे पर, जिसने समय को एक सदी से अधिक करीब से देखा हो।
मोहिनी देवी को सादर नमन।
— BP Live Media
