जौनपुर में गोमती का उफान: 1980 की महाबाढ़ के चश्मदीद बोले– टीडी कॉलेज में ली थी शरण ओलंदगंज की दीवार पर आज भी दर्ज है वो खौफनाक निशान
जौनपुर में गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर शहरवासियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। उफनती नदी को देखकर 1980 की उस प्रलयंकारी महाबाढ़ की यादें ताजा हो गई हैं, जब आधा जौनपुर पानी में डूब गया था।
प्रत्यक्षदर्शी का अनुभव (Eye-Witness Account)
शाही पुल के पास नदी तट पर रहने वाले स्थानीय निवासी पप्पू निषाद समय काफी छोटे थे, लेकिन 1980 का वो दृश्य आज भी उनके जेहन में साफ है।
"पुल की सड़क के किनारे लगी लोहे की जाली तक पानी पहुंच चुका था। चारों तरफ सिर्फ जलप्रलय था। हम सबने जान बचाने के लिए तिलकधारी सिंह कॉलेज में शरण ली थी।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या वैसी ही बाढ़ फिर आ सकती है? तो उनका कहना था कि पानी जरूर बढ़ेगा, लेकिन 1980 जैसी भयानक तबाही दोबारा होने की संभावना कम है।
ओलंदगंज की दीवार पर दर्ज इतिहास (Visual Proof)
ओलंदगंज जौनपुर में स्थित वह ऐतिहासिक पत्थर, जिस पर 6 अक्टूबर 1980 की महाबाढ़ का जलस्तर खुदा हुआ है।
पप्पू निषाद की बातों की सच्चाई शहर के पुराने इलाके खुद बयां करते हैं। ओलंदगंज स्थित एक पुराने मकान पर लगा वो ऐतिहासिक पत्थर आज भी 1980 के उस खौफनाक मंजर का गवाह है। उस पत्थर पर बाकायदा 'अक्टूबर 1980' का जलस्तर उकेरा गया है, जो बताता है कि पानी किस हद तक रिहायशी इलाकों में दाखिल हो गया था।
निष्कर्ष (Conclusion)
भले ही प्रशासनिक उपाय और आधुनिक संरचनाएं अब बेहतर हैं, लेकिन गोमती के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों में अलर्ट की स्थिति है।

