जौनपुर में मानदेय को लेकर आशा बहुओं का प्रदर्शन, लखनऊ कूच की चेतावनी

जौनपुर कलेक्ट्रेट में आशा बहू कल्याण समिति उ.प्र. के बैनर तले प्रदर्शन करती सैकड़ों आशा बहू कार्यकर्ता

 जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में 'आशा बहू कल्याण समिति (उ.प्र.)' की प्रांतीय अध्यक्ष सीमा सिंह के नेतृत्व में मानदेय निर्धारण और बकाया भुगतान की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन करतीं हजारों आशा बहुएं और संगिनियां।

जौनपुर / उत्तर प्रदेश:

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा और आशा संगिनियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जौनपुर में हजारों की संख्या में एकजुट होकर आशा बहुओं ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन जिलाधिकारी (DM) को सौंपा।

​आशा बहू कल्याण समिति (उ.प्र.) के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला। संघ की पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार एक तरफ 'महिला सम्मान' और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ मानदेय वृद्धि और बकाए भुगतान के मामले में उनकी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने मांग की है कि आंगनबाड़ी, शिक्षामित्रों और चौकीदारों की तर्ज पर फरवरी माह में की गई घोषणा के अनुसार उनका भी मानदेय तत्काल फिक्स किया जाए।

 ज्ञापन में उठाई गईं मुख्य मांगें

आशा बहू कल्याण समिति द्वारा जौनपुर डीएम को सौंपा गया ज्ञापन पत्र

जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की गई है:
  • मानदेय का निर्धारण: फरवरी में की गई घोषणा के अनुसार मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

  • टीबी (T.B.) का बकाया भुगतान: वित्तीय वर्ष 2025 से 2026 तक का लंबित टीबी भुगतान तुरंत जारी किया जाए।

  • टीबी मरीज व आशा इंसेंटिव: वर्ष 2024 से 2026 तक का रुका हुआ इंसेंटिव जल्द से जल्द दिया जाए।

  • आभा आईडी (ABHA ID): आभा कार्ड/आईडी बनाने के काम का रुका हुआ भुगतान तत्काल दिलाया जाए।

 26 सितंबर की समयसीमा: लखनऊ कूच की चेतावनी

​प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि 26 सितंबर तक उनके मानदेय का निर्धारण नहीं किया गया और बकाया भुगतान की समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ, तो प्रदेश भर की हजारों आशा बहुएं राजधानी लखनऊ कूच करेंगी और वहां उग्र प्रदर्शन व आंदोलन करने को बाध्य होंगी।

​स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने वाली इन महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफल बनाने के बावजूद उन्हें उनके हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। अब सभी की नजरें 26 सितंबर की समयसीमा पर टिकी हैं कि शासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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