अधिवक्ताओं का बड़ा कदम: जौनपुर में एकदिवसीय उपवास, 'अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम' लागू करने के लिए राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग को लेकर जौनपुर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते अधिवक्ता

 उत्तर प्रदेश में वकीलों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद होने लगी है। राज्य में लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं और अधिवक्ताओं पर हो रहे हमलों के विरोध में जौनपुर के वकीलों ने लामबंद होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

'अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम' (Lawyers Protection Act) को प्रदेश में जल्द से जल्द लागू करने की मांग को लेकर निवेदक अधिवक्ता शिव कुमार मिश्र के नेतृत्व में सिविल कोर्ट और कलेक्ट्रेट जौनपुर के दर्जनों अधिवक्ताओं ने एकदिवसीय शांतिपूर्ण उपवास व धरना प्रदर्शन किया।

धरना स्थल पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट, ज्ञापन स्वीकार कर दिया आश्वासन

वकीलों के इस अनुशासित और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं की सुरक्षा और लोकतंत्र की रक्षा के पक्ष में जमकर नारेबाजी हुई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट जौनपुर खुद धरना स्थल पर पहुंचे।

उन्होंने अधिवक्ताओं का उपवास तुड़वाया और उनके द्वारा दिए गए ज्ञापन को स्वीकार किया। सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रदर्शनकारी वकीलों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों का यह ज्ञापन जल्द से जल्द माननीय राज्यपाल महोदय तक पहुंचा दिया जाएगा।

अधिवक्ताओं की मुख्य मांगें:

अधिनियम का पारित होना: उत्तर प्रदेश में 'अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम' का विधेयक अविलंब विधानसभा से पारित किया जाए।

कड़े कानूनी प्रावधान: अधिवक्ताओं पर होने वाले हमलों और मानसिक/शारीरिक उत्पीड़न को रोकने के लिए कड़े कानूनी संरक्षण की व्यवस्था हो।

वित्तीय सहायता: पीड़ित या दुर्घटनाग्रस्त अधिवक्ताओं के परिवारों के लिए वित्तीय सहायता एवं क्षतिपूर्ति का ठोस प्रावधान किया जाए।

राजस्थान और तेलंगाना की तर्ज पर बने कानून: अधिवक्ता शिव कुमार मिश्र

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता शिव कुमार मिश्र ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा:

"जब तक राजस्थान, कर्नाटक और तेलंगाना की तरह उत्तर प्रदेश में भी यह सुरक्षा कानून लागू नहीं हो जाता, हमारा संघर्ष यूं ही जारी रहेगा।"

उन्होंने आगे कहा कि सूबे के मुख्यमंत्री ने कानून मंत्रालय अपने पास रखा हुआ है, जिसकी वजह से अधिवक्ताओं के वास्तविक हित और समस्याओं को नहीं समझा जा रहा है। सरकार में कई अधिवक्ता विधायक मौजूद हैं, ऐसे में कानून मंत्रालय किसी योग्य एवं काबिल अधिवक्ता को सौंपा जाना चाहिए ताकि वकीलों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

लखनऊ तक पैदल यात्रा का अल्टीमेटम

अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन केवल जौनपुर तक सीमित नहीं रहेगा। बहुत जल्द अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू कराने की मांग को लेकर जौनपुर से लखनऊ विधानसभा तक विशाल पैदल यात्रा निकाली जाएगी।

प्रदर्शन में ये प्रमुख अधिवक्ता रहे मौजूद

इस एकदिवसीय उपवास और विरोध प्रदर्शन में जौनपुर सिविल कोर्ट व कलेक्ट्रेट के कई वरिष्ठ एवं युवा अधिवक्ता शामिल हुए। प्रमुख रूप से सुरेंद्र प्रजापति, देवानंद मिश्रा, सकलैन हैदर, विकास यादव, आबिद सिद्दीकी, रामदेवल यादव, प्रतिभा सिंह, अभिषेक पाठक, विजय, जयशंकर बिंद, राजेंद्र प्रसाद यादव, मनोहर बिंद, पुष्पेंद्र निषाद, सोहेल खान, कैलाशनाथ और शैलेंद्र यादव सहित कई अन्य वकीलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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