जौनपुर (उत्तर प्रदेश)। "पितृ देवो भव:"— सनातन संस्कृति में अपने पूर्वजों और पितरों का स्थान ईश्वर के तुल्य माना गया है। इसी पवित्र परंपरा और संकल्प को जीवंत करते हुए जौनपुर शहर से एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाली धार्मिक यात्रा का शुभारंभ हुआ। 'युवा बजरंग दल' के नगर अध्यक्ष सुभाष गर्ग अपने पुरखों की जन्मभूमि यानी जौनपुर की पावन माटी को लेकर मोक्षदायिनी नगरी 'गयाजी' (बिहार) के लिए रवाना हुए।
पैतृक आवास के मुख्य द्वार से शुरू हुई यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, पारिवारिक संस्कारों और समूचे जौनपुर शहर की आस्था की साझा यात्रा बन गई।
कैप्शन: हाथ में छड़ी, बंधी गठरी और भगवा वस्त्र धारण किए परिवार संग गयाजी यात्रा पर निकलते सुभाष गर्ग
1. घर की चौखट से रवानगी: जोगिया वस्त्र, हाथ में छड़ी और माटी की गठरी
यात्रा का प्रारंभ सुभाष गर्ग के पैतृक आवास से अत्यंत वैदिक एवं सनातन विधान के साथ हुआ। जोगिया (भगवा) वस्त्र धारण किए, एक हाथ में छड़ी और उसके छोर पर बंधी पुरखों की पवित्र माटी की गठरी सहेजे सुभाष गर्ग जब घर के मुख्य दरवाजे से बाहर निकले, तो माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो उठा।
पारंपरिक सनातन वेशभूषा में निकली इस यात्रा ने हर देखने वाले का ध्यान आकर्षित किया।
2. परिजनों का समूह और भावुक क्षण: बहन की विदाई और बच्चों का साथ
जैसे ही यात्रा की शुरुआत हुई, पैतृक आवास की गलियां परिजनों के हुजूम से गूंज उठीं। पत्नी, दोनों बेटों, भाइयों, भतीजों और रिश्तेदारों का समूह अपने पैतृक आवासों के प्रांगण को गूंथते हुए साथ-साथ चला।
विदाई के इस पल में पारिवारिक आत्मीयता का अनूठा दृश्य देखने को मिला। भाई से लिपटकर बहन अत्यंत भावुक हो गई, वहीं पत्नी और बच्चों ने इस पवित्र धार्मिक कार्य के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ मंगलकामनाएं दीं।
रवानगी के समय भाई से लिपटकर भावुक हुई बहन
3. बुजुर्गों का आशीर्वाद और आत्मीय सम्मान
सनातन परंपरा में किसी भी महासंकल्प की सिद्धि बिना बड़ों के आशीर्वाद के अधूरी मानी जाती है। नगर के गणमान्य एवं घर-परिवार के बुजुर्गों ने सुभाष गर्ग का माथे पर तिलक लगाकर, अंगवस्त्र भेंटकर और चरण स्पर्श के पश्चात अपना वरदहस्त देकर यात्रा को सफल होने का शुभ आशीष दिया।
4. शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी यात्रा: ओलंदगंज, तूतीपुर और चाहरसू का नज़ारा
घर से निकलकर यह यात्रा जौनपुर शहर के हृदयस्थलों से होती हुई आगे बढ़ी। ओलंदगंज, तूतीपुर और चाहरसू चौराहे पर स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और युवाओं ने गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। 'जय श्रीराम' और 'हर हर महादेव' के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा।
5. सिद्ध पीठ बाबा केरारबीर मंदिर में दर्शन-पूजन और अंतिम रवानगी
शहर के प्रमुख मार्गों का भ्रमण करते हुए यात्रा जौनपुर के प्राचीन एवं ऐतिहासिक सिद्ध पीठ बाबा केरारबीर मंदिर पहुंची। यहां सुभाष गर्ग और उनके साथियों ने बाबा केरारबीर के चरणों में माथा टेका, विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया और यात्रा की निर्विघ्न पूर्णता हेतु प्रार्थना की।
मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के पश्चात, सुसज्जित वाहनों के काफिले के साथ यात्रा गयाजी (बिहार) के लिए अंतिम रूप से रवाना हुई। वाहन के सनराइज/खिड़की से बाहर निकलकर सुभाष गर्ग ने हाथ उठाकर उपस्थित शहरवासियों और अपनों का अभिवादन स्वीकार किया।
कैप्शन: जौनपुर शहर से गयाजी यात्रा की भव्य रवानगी, ढोल-नगाड़ों और परिजनों के भावुक क्षणों की पूरी वीडियो रिपोर्ट देखें।
गयाजी में 'पुरखों की माटी' से तर्पण का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिहार स्थित गयाजी (गया धाम) फल्गु नदी के तट पर स्थित वह पवित्र स्थान है जहाँ पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। अपने पैतृक स्थान (जौनपुर) की माटी को गयाजी ले जाकर तर्पण में अर्पित करना एक अत्यंत दुर्लभ और भावुक सनातन परंपरा है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपनी जन्मभूमि और पूर्वजों के प्रति कितना कृतज्ञ है।
📌 निष्कर्ष एवं शुभकामनाएं
जौनपुर की पावन माटी को लेकर गयाजी निकले 'युवा बजरंग दल' के संस्थापक सुभाष गर्ग का यह संकल्प आज की युवा पीढ़ी के लिए अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़ने का एक उत्कृष्ट संदेश देता है। सम्पूर्ण जौनपुर शहर उनकी इस यात्रा की सफलता और सकुशल वापसी की मंगलकामना करता है।
जय श्री राम! जय सनातन धर्म!














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